“शीश नहीं झुकेगा” अटलजींनी पाकिस्तानला सुनावले होते खडे बोल 

माजी पंतप्रधान अटल बिहारी वाजपेयी हे उत्तम राजकीय पटू सोबत पत्रकार आणि कवी होते. त्यांच्या अनेक कविता गाजल्या त्यांच्या कवितेतून देशभक्ती व्यक्त होत होती. अटलजींच्या शब्दात धार होती “मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं” त्यांची ही कविता चांगलीच लोकप्रिय झाली होती.

या कवितेच्या माध्यमातून त्यांनी पाकिस्तानला खडे बोल सुनावले होते. दरम्यान, वाजपेयी यांची प्रकृती चिंताजनक असून त्यांना एम्स रुग्णालयात फुल लाईफ सपोर्ट सिस्टीमवर ठेवण्यात आले आहे. 

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वाचा अटलजींची ही कविता… 

”शीश नहीं झुकेगा”

एक नहीं, दो नहीं, करो बीसों समझौते

पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा

अगणित बलिदानों से अर्जित यह स्वतंत्रता

त्याग, तेज, तप, बल से ‍रक्षित यह स्वतंत्रता

प्राणों से भी प्रियतर यह स्वतंत्रता…

 

इसे मिटाने की ‍साजिश करने वालों से

कह दो चिनगारी का खेल बुरा होता है

औरों के घर आग लगाने का जो सपना

वह अपने ही घर में सदा खरा होता है.

 

अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र न खोदो

अपने पैरों आप कुल्हाड़ी नहीं चलाओ

ओ नादान पड़ोसी अपनी आंखें खोलो

आजादी अनमोल न इसका मोल लगाओ.

 

पर तुम क्या जानो आजादी क्या होती है

तुम्हें मुफ्‍त में मिली न कीमत गई चुकाई

अंग्रेजों के बल पर दो टुकड़े पाए हैं

मां को खंडित करते तुमको लाज न आई.

 

अमेरिकी शस्त्रों से अपनी आजादी को

दुनिया में कायम रख लोगे, यह मत समझो

दस-बीस अरब डॉलर लेकर आने वाली

बरबादी से तुम बच लोगे, यह मत समझो.

 

धमकी, जेहाद के नारों से, हथियारों से

कश्मीर कभी हथिया लोगे, यह मत समझो

हमलों से, अत्याचारों से, संहारों से

भारत का शीश झुका लोगे, यह मत समझो.

 

जब तक गंगा की धार, सिंधु में ज्वार

अग्नि में जलन, सूर्य में तपन शेष

स्वातंत्र्य समर की वेदी पर अर्पित होंगे

अगणित जीवन, यौवन अशेष.

 

अमेरिका क्या संसार भले ही हो विरुद्ध

काश्मीर पर भारत का ध्वज नहीं झुकेगा,

एक नहीं, दो नहीं, करो बीसों समझौते

पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा.


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